चण्डीगढ़-पंजाब : मोहाली स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने कुख्यात मोगा सेक्स स्कैंडल मामले में पंजाब के चार पूर्व पुलिस अधिकारियों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। दोषियों में तत्कालीन एसएसपी दविंदर सिंह गरचा, पूर्व एसपी हेडक्वार्टर मोगा परमदीप सिंह संधू, मोगा सिटी थाने के पूर्व एसएचओ रमन कुमार और मोगा के सिटी पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर अमरजीत सिंह शामिल हैं। दोषियों पर अदालत ने दो-दो लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है।
वहीं सीबीआई कोर्ट ने पूर्व एसएचओ रमन कुमार को फिरौती एक्ट की धाराओं के तहत तीन साल की अतिरिक्त सजा और एक लाख रुपये जुर्माना किया है। दोषियों के खिलाफ रणजीत सिंह ने अदालत में केस दायर किया था। वहीं मामले में अकाली नेता तोता सिंह के बेटे आरोपी बरजिंदर सिंह उर्फ मक्खन और सुखराज सिंह को बरी किया गया है।
क्या था मामला
यह मामला 2007 में उस समय सामने आया था, जब राज्य में अकाली-भाजपा सरकार थी। मोगा के थाना सिटी ने जगरांव के एक गांव की लडक़ी की शिकायत पर गैंगरेप का मामला दर्ज किया था। इसके बाद पीड़िता के बयान दर्ज किए। इसमें उसने करीब 50 अज्ञात लोगों पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने इस केस की जांच में ब्लैकमेलिंग करनी शुरू कर दी थी। उन्होंने केस में कई व्यापारियों और राजनेताओं के नाम जोड़ दिए। इसी दौरान मोगा के भागी के गांव के रंजीत सिंह ने एसएचओ अमरजीत सिंह द्वारा 50 हजार रुपये मांगने की ऑडियो रिकॉर्ड कर ली। उसको धमकी दी गई थी कि रुपये न देने पर उसे दुष्कर्म के मामले में उसे गिरफ्तार कर लेंगे। रंजीत ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) को इसकी शिकायत की। इसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया था। जब इस मामले में राजनेताओं और व्यापारियों के नाम आने लगे, मीडिया में यह केस सुर्खियों बनने लगा तो 12 नवंबर 2007 को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले का खुद ही संज्ञान लिया। साथ ही पुलिस ने इस मामले की रिपोर्ट मांगी। इसके बाद सारे केस की जांच करने के बाद हाईकोर्ट ने मामला सीबीआई को सौंप दिया था।

More Stories
नितिन कोहली कार्यालय की ओर से नई हेल्पलाइन और कार्यालय सेवा की आधिकारिक शुरुआत,किया हेल्पलाइन नंबर जारी
जालंधर में फिर हुई शर्मनाक घटना , शिक्षक दसवीं की छात्रा के साथ करने लगा जबरदस्ती
*ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਸੰਵਿਧਾਨ ਦੀ ਸੋਧ ਕਰਕੇ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਨੂੰ ਪੰਜਾਬ ਨਾਲੋਂ ਖੋਹਣਾ ਪੰਜਾਬੀਆਂ ਨਾਲ ਬੇਇਨਸਾਫੀ ਅਤੇ ਸਾਡੇ ਸੰਵਿਧਾਨਿਕ ਹੱਕਾਂ ਤੇ ਡਾਕਾ ਹੈ। ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਨਾਲ ਪੰਜਾਬੀਆਂ ਦੇ ਜਜ਼ਬਾਤ ਜੁੜੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਕਦੇ ਵੀ ਪੰਜਾਬ ਤੋਂ ਵੱਖ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ