21 तोपों की सलामी के बाद दी जाएगी मुखाग्नि
मुंबई। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और फिल्म निर्देशक मनोज कुमार का 4 अप्रैल को सुबह लगभग 3:30 बजे निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और कुछ हफ्तों से मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती थे। उनका निधन सिनेमा जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। आज 5 अप्रैल को उनका अंतिम संस्कार मुंबई के जुहू स्थित पवनहंस श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
राजकीय सम्मान के साथ विदाई
मनोज कुमार के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर जुहू स्थित पवनहंस श्मशान घाट लाया गया। श्मशान घाट में उनके पार्थिव शरीर को 21 तोपों की सलामी दी गई। उनके अंतिम संस्कार के लिए परिवार, करीबी दोस्त, और फिल्म इंडस्ट्री के कई प्रमुख सितारे मौजूद थे। अंतिम संस्कार का समय लगभग 11:30 बजे निर्धारित किया गया, जब उन्हें मुखाग्नि दी जाएगी
भावुक हुए गायक अनु मलिक
मनोज कुमार के निधन पर संगीतकार और गायक अनु मलिक ने भावुक होते हुए कहा, जो भी फिल्में उन्होंने बनाई हैं, वह समाज और देश के भले के लिए बनाई हैं। ऐसे लोग बार-बार इस दुनिया में नहीं आते। हमें मनोज कुमार साहब की फिल्मों, उनके गानों और उनके निर्देशन से प्रेरणा लेनी चाहिएज् मैं बहुत भावुक हूं, जैसे हर कोई है, पूरा देश बहुत दुखी है कि एक कलाकार हमसे दूर चला गया जो कभी इस दुनिया में वापस नहीं आएगा।
प्रेम चोपड़ा ने अपने दोस्त को दी श्रद्धांजलि
अभिनेता प्रेम चोपड़ा ने मनोज कुमार के निधन पर कहा कि हम शुरुआत से ही साथ थे। यह एक शानदार सफर रहा। उनके साथ काम करके हर किसी को फायदा हुआ। मुझे भी उनसे बहुत कुछ मिला। वह मेरे बहुत अच्छे दोस्त थे, बल्कि कह सकता हूं कि वह मेरे सबसे अच्छे दोस्तों में से एक थे।
करीबी लोग अंतिम संस्कार में शामिल
मनोज कुमार की पत्नी शशि गोस्वामी अपने पति के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जुहू स्थित श्मशान घाट पहुंचीं। वह गम में डूबी नजर आईं, और यह उनके लिए एक बेहद दुखद पल था। वहीं, अभिनेता प्रेम चोपड़ा हाथ में लाठी और सहारा लेते हुए पवनहंस श्मशान घाट पहुंचे। फिल्म ‘उपकार’ में प्रेम चोपड़ा ने मनोज कुमार के छोटे भाई का किरदार निभाया था। हालांकि, प्रेम मनोज कुमार से उम्र में दो साल बड़े थे, लेकिन दोनों का रिश्ता एक गहरे दोस्ती का था।
मनोज कुमार का सिनेमा में योगदान
मनोज कुमार का भारतीय सिनेमा में योगदान हमेशा जीवित रहेगा। उनकी फिल्में, जिनमें ‘उपकार’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘शहीद’ और ‘क्रांति’ शामिल हैं, आज भी दर्शकों के दिलों में बसी हुई हैं। उनका काम और देशभक्ति पर आधारित फिल्मों का योगदान सिनेमा जगत के इतिहास में सदैव याद किया जाएगा।

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