मुख्यमंत्री मान ने अफसरों को दिए सख्त आदेश
पंजाब : राज्य में नशे की समस्या को लेकर सरकार ने एक बड़े कदम के रूप में युद्ध स्तर पर नशे विरुद्ध अभियान की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नशा मुक्ति अभियान के तहत अफसरों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि लापरवाही अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने अफसरों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अगर सेवाओं में गिरावट आई या अगर कोई लापरवाही हुई, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आम आदमी पार्टी सरकार ने राज्य में नशे से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। इन फैसलों में नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या में वृद्धि और उनकी आधुनिक सुविधाओं को शामिल किया गया है।
1. नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या में बढ़ोतरी
बता दें कि, पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत अब डि-एडिक्शन बेड्स की संख्या 1,500 से बढ़ाकर 5,000 कर दी गई है, जिससे अधिक से अधिक प्रभावित लोगों को समय पर इलाज मिल सकेगा। पंजाब सरकार ने डि-एडिक्शन बेड्स की संख्या को 1,500 से बढ़ाकर 5,000 कर दिया है। इसके अलावा, नए नशा मुक्ति केंद्रों की स्थापना की जा रही है, ताकि नशे से प्रभावित लोगों को अधिक संख्या में सहायता मिल सके। इस कदम का उद्देश्य राज्य में नशे की लत से छुटकारा पाने वाले लोगों की संख्या को बढ़ाना है।
2. पुराने केंद्रों में सुधार
पंजाब सरकार ने न सिर्फ नए नशा मुक्ति केंद्रों की स्थापना की है, बल्कि पुराने केंद्रों को भी आधुनिक सुविधाओं से लैस किया है। अब इन केंद्रों में एयर कंडीशनिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जो मरीजों को बेहतर वातावरण में उपचार प्राप्त करने का अवसर देंगी।
3. ओ.ओ.ए.टी. केंद्रों की संख्या में वृद्धि
पंजाब में ओ.ओ.ए.टी. केंद्रों की संख्या भी बढ़ाई गई है। इन केंद्रों का उद्देश्य ओपियोइड के आदी लोगों को बेहतर इलाज और दवाइयां उपलब्ध कराना है। अब ओ.ओ.ए.टी. केंद्रों की संख्या 529 से बढक़र 565 हो गई है। इस कदम से नशे के आदी लोगों को आसानी से समान और सुलभ उपचार मिलेगा।
4. हर •िाले में दवाइयों की उपलब्धता
पंजाब सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि राज्य के हर जिले में नशे के इलाज के लिए जरूरी दवाइयां सुलभ और उपलब्ध हों। इससे नशे की समस्या से जूझ रहे व्यक्तियों को समय पर उपचार मिल सकेगा और उनकी रिकवरी में मदद मिलेगी।
पंजाब सरकार का यह नशे विरुद्ध अभियान एक सकारात्मक कदम है, जिससे न केवल नशे के आदी लोगों को बेहतर इलाज और समर्थन मिलेगा, बल्कि पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। सरकार द्वारा उठाए गए इन कदमों से यह उम्मीद जताई जा रही है कि नशे की समस्या पर काबू पाया जा सकेगा और प्रभावित लोग जल्दी से जल्दी स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ा सकेंगे।

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