जालंधर ( वरिंदर शर्मा ) मानवाधिकार परिषद इंडिया के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने परिषद की राष्ट्रीय अध्यक्ष आरती राजपूत के नेतृत्व में राजभवन पहुंचकर मध्यप्रदेश के महामहिम राज्यपाल मंगूभाई छगनभाई पटेल से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान परिषद के पदाधिकारियों ने प्रदेश की जीवन रेखा माँ नर्मदा के संरक्षण और मालवा-निमाड़ की ऐतिहासिक धरोहरों से जुड़े अत्यंत संवेदनशील विषयों पर विस्तार से चर्चा कर ज्ञापन सौंपा।इस मौके प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष संतोष सिंह ठाकुर, प्रदेश सचिव गोविंद सिंह कुशवाहा, उज्जैन जिला अध्यक्ष गुरमल सिंह और मंदसौर जिला अध्यक्ष लक्ष्मण गुर्जर प्रमुख रूप से सम्मिलित रहे। इस दौरान आरती राजपूत ने महामहिम राज्यपाल को अवगत कराया कि खरगोन जिले की जीवनदायिनी माँ नर्मदा से पूरी नर्मदा पट्टी क्षेत्र में पिछले दो दशकों से जारी अनियंत्रित रेत उत्खनन और तटों पर लगे प्राचीन वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से न केवल पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि माँ नर्मदा का अस्तित्व भी संकट में है। उन्होंने बताया कि अवैध उत्खनन व बुलडोजरों के प्रहार से नदी के दोनों किनारे छलनी हो चुके हैं और परिक्रमा पथ के जर्जर होने से देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस मौके परिषद ने मांग की है कि नर्मदा के पावन आंचल को बचाने के लिए इस अवैध दोहन पर तत्काल और स्थायी रोक लगाई जाए।

इस ज्ञापन में मंडलेश्वर स्थित ऐतिहासिक विरासतों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया।इस मौके संतोष सिंह ठाकुर ने महामहिम को बताया कि वर्तमान में संचालित महात्मा गांधी हायर सेकेंडरी स्कूल का भवन ब्रिटिश कालीन ‘रेजीडेंट हाउस’ रहा है, जो 1857 की क्रांति और होलकर रियासत के गौरवशाली इतिहास का मूक गवाह है।

परिषद ने इस भवन को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने और स्कूल को अन्यत्र स्थानांतरित कर यहाँ एक भव्य राष्ट्रीय स्मारक बनाने की मांग की है। साथ ही, उस ऐतिहासिक स्थल (फांसी बेड़ी ) को भी संरक्षित कर राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने का आग्रह किया गया जहाँ स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों को फांसी दी जाती थी। चर्चा के दौरान राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने मानवाधिकार परिषद द्वारा किए जा रहे इन सामाजिक और राष्ट्रहित के कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना की। महामहिम ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे इन मांगों को गंभीरता से सरकार तक पहुँचाएंगे और शीघ्र ही स्वयं मंडलेश्वर पहुंचकर इन दोनों ऐतिहासिक स्मारकों का प्रत्यक्ष अवलोकन करेंगे। इस आश्वासन के बाद परिषद के पदाधिकारियों ने महामहिम का आभार व्यक्त किया।

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